पब्लिक प्रोक्योरमेंट (प्रेफरेंस टू मेक इन इंडिया) ऑर्डर के तहत सरकारी खरीदार उन सप्लायर को प्राथमिकता देते हैं जिनके सामान, सेवा या काम में लोकल कंटेंट ज़्यादा है।
सप्लायर की श्रेणियां
| श्रेणी | लोकल कंटेंट |
|---|---|
| क्लास-I लोकल सप्लायर | 50% या उससे ज़्यादा |
| क्लास-II लोकल सप्लायर | 20% से ज़्यादा लेकिन 50% से कम |
| नॉन-लोकल सप्लायर | 20% या उससे कम |
नोडल मंत्रालय खास आइटम के लिए अलग न्यूनतम लोकल कंटेंट तय कर सकते हैं, इसलिए टेंडर की अपनी शर्त ही मान्य है।
परचेज़ प्रेफरेंस
- लोकल सप्लायर को दूसरों पर प्राथमिकता मिलती है।
- परचेज़ प्रेफरेंस का मार्जिन 20% है: ऑर्डर के मैचिंग नियमों के तहत लोकल सप्लायर की कीमत L1 से 20% तक ज़्यादा होने पर भी प्राथमिकता मिल सकती है।
- ₹200 करोड़ से कम अनुमानित वैल्यू की खरीद में आमतौर पर सिर्फ क्लास-I और क्लास-II लोकल सप्लायर बिड कर सकते हैं।
आपको क्या करना है
- भारत में जोड़ी गई वैल्यू सहित अपना लोकल कंटेंट ईमानदारी से निकालें।
- टेंडर में मांगे गए फॉर्मेट में घोषणा या सर्टिफिकेट दें।
- GeM पर प्रोडक्ट लिस्टिंग में लोकल कंटेंट सही भरें।
लोकल कंटेंट की गलत घोषणा से रिजेक्शन, डिबारमेंट और अन्य कार्रवाई हो सकती है। शक हो तो गणना जंचवा लें।
स्रोत
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